Pariyon ki Kahaniyan-गरीब आदमी और परी

गरीब आदमी और परी-Pariyon ki Kahaniyan 

Pariyon ki kahaniyan

 

एक गरीब आदमी था। उसके घर खाने को कुछ नहीं रहा तो उसने शहर जाकर कमाने की सोची।रास्ते में खाने के लिए उसकी पत्नी ने पडोसी से जरा सा आटा उधार मांगकर दो  रोटियां बांध दी। रास्ते में सांझ हो गई। वह एक पेड़ के नीचे लेट गया। उस  पेड पर रात को परी आती थी। उस आदमी की आंख खुली। उसे बहुत तेज भूख लगी। जैसे ही वह रोटी खाने बैठा एक गरीब सी लड़की उसके सामने आई और बोली मैं जंगल में भटक गई हूँ । मुझे बहुत भूख लगी है मुझपर दया करके मुझे कुछ खाना दे दो।

उसने अपनी दोनों रोटियां उसे दे दी। तभी लड़की परी में बदल गई। वह बोली- तुमने खुद भूखे रहकर भी मुझे खाना दिया। इसलिए आगे से तुम्हें कभी भोजन की कमी नहीं पडेगी।  परी ने उसे एक पौधा देते हुए कहा इसे अपने घर में बो देना। यह एक सप्ताह में ही बडा हो जाएगा व बारहों महीने इसपर फलफूल आएंगे जिन्हें बेचकर तुम धनवान हो जाओगे व कभी भी तुम्हारे घर किसी चीज की कमी नहीं रहेगी।  उस आदमी न वैसा ही किया ।

उस पौधे पर बहुत सुंदर फूल आए। कुछ दिनों में वह बडा हो गया। वह स्वादिष्ट फलों से लद गया । उन्हें बेचकर वह व्यक्ति खुशहाल हो गया।

बौना शैतान-Pariyon ki Kahaniyan 

Pariyon ki kahaniyan

एक परी हमेशा मुसीबत में पडे लोगों की मदद करती थी। पर एक बौने शैतान को वह बहुत बुरी लगती थी। एक दिन शैतान बौने ने जादूई पाश में परी को फंसा लिया। उसकी छडी को छुपा दिया।

अब परी बेबस हो गई। वह चिल्लाने के अलावा कुछ नहीं कर सकती थी। पर चूंकि परी सबकी मदद करती थी इसलिए सभी पशु पक्षी उसे छुडाने के लिए उतावले हो उठे। वे उसकी छडी ढूंढने निकल पडे। दूसरी तरफ बौने के ऊपर हजारों मधुमक्खियाँ टूट पडी। मानो वे कह रही हो कि हमारी मददगार परी रानी को छोड़ दो नहीं तो वे उसे जान से मार देंगी।

शैतान बौने ने परी का बंधन खोल दिया। अब परी आजाद थी। बौने ने फिर कभी परी को तंग न करने की कसम खाई। परी के आजाद होने पर सभी जानवर खुशी से नाचने लगे।

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जलपरी-Pariyon ki Kahaniyan 

Pariyon ki kahaniyan

एक जलपरी समुद्र में रहती थी। उस समुद्र के किनारे एक युवक चट्टान पर बैठकर बांसुरी बजाता था। उसकी बांसुरी की सुरीली आवाज सुनकर वह किनारे आ जाती और बांसुरी की मधुर धुन में खो जाती। वह युवक बहुत सुंदर था। जलपरी को उससे प्रेम हो गया । एक दिन जलपरी ने उससे पूछा, कि वह रोज चट्टान पर बैठकर बांसुरी क्यों बजाता है?

युवक ने उत्तर दिया, “एक दिन जब मैं बहुत छोटा था तब मेरे पिता मैं और मेरी मां के साथ आए थे,तब अचानक से समुद्र में तेज लहरें  उठने लगी उनमें मैं और मेरी मां दोनों डूबने लगे तब मेरे पिता ने बडे साहस के साथ हम दोनों को बचाने की कोशिश की पर वे मुझे तो बचाने में कामयाब हो गए पर लहरें मेरी मां को बहा ले गई तब से मैं उनकी याद में बांसुरी बजाता हूँ। “

“हो सकता है तुम्हारी मां जिंदा हो!” जलपरी ने कहा। “शायद!” युवक ने कहा। “मैं कोशिश करूं ढूँढने की!” परी ने कहा, “वे कैसी दिखती थी?” “मेरी मां की कलाई के पास एक अर्धचंद्र का निशान था” युवक ने कहा।उसकी बांसुरी की सुरीली आवाज सुनकर वह किनारे आ जाती और बांसुरी की मधुर धुन में खो जाती। वह युवक बहुत सुंदर था। जलपरी को उससे प्रेम हो गया । एक दिन जलपरी ने उससे पूछा, कि वह रोज चट्टान पर बैठकर बांसुरी क्यों बजाता है? युवक ने उत्तर दिया, “एक दिन जब मैं बहुत छोटा था तब मेरे पिता मैं और मेरी मां के साथ आए थे

तब अचानक से समुद्र में तेज लहरें  उठने लगी उनमें मैं और मेरी मां दोनों डूबने लगे तब मेरे पिता ने बडे साहस के साथ हम दोनों को बचाने की कोशिश की पर वे मुझे तो बचाने में कामयाब हो गए पर लहरें मेरी मां को बहा ले गई तब से मैं उनकी याद में बांसुरी बजाता हूँ। “

“हो सकता है तुम्हारी मां जिंदा हो!” जलपरी ने कहा। “शायद!” युवक ने कहा। “मैं कोशिश करूं ढूँढने की!” परी ने कहा, “वे कैसी दिखती थी?” “मेरी मां की कलाई के पास एक अर्धचंद्र का निशान था” युवक ने कहा।

जलपरी ने कहा, “अगर तुम्हारी मां जिंदा हुई तो मैं तुम्हारी मां को वापस मिलवाने में जरूर मदद करूंगी।” दूसरे दिन परी आई और बोली, “तुम्हारी मां जिंदा है और यहाँ के पास द्वीप में आदिवासी कबीले में रहती है शायद उनकी याददाश्त जा चुकी है।” “हमारा उनके क्षेत्र में जाना निषेध है पर मैं तुम्हें एक जडीबूटी बताती हूँ जिससे उनकी याददाश्त वापस आ जाएगी।”

युवक उस जडीबूटी को ढूंढ लाया। उसे लेकर वह उस द्वीप में जाने की तैयारी करने लगा। जलपरी ने उस द्वीप के बारे में बताया और एक ऐसा इत्र भी दिया जिसकी गंध से कोई भी मूर्छित हो जाता है। युवक भेष बदलकर द्वीप में पहुंच गया। और वह इत्र छिडक दिया। उसके प्रभाव से आसपास के लोग मूर्छित हो गये। वह अपनी मां को मूर्छित अवस्था में ही ले आया। और वह जडीबूटी पिला दी। उसके प्रभाव से उसकी मां की याददाश्त वापस आ गई।

उसकी मां को सारी बातें याद आ गई। उसने अपने बेटे को गले लगा लिया। युवक ने बताया कि ये सब जलपरी के कारण संभव हुआ है। एकदिन जलपरी मछुआरों के जाल में फंस गई। मछुआरे जलपरी को नीलाम करने की योजना बना रहे थे।  युवक ने जानपर खेलकर जलपरी को आजाद करवाया।युवक घायल हो गया पर उसे खुशी थी कि उसने जलपरी की मदद की। इस तरह वे दोनों पक्के मित्र बन गए।

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लकड़हारे का सपना-Pariyon ki Kahaniyan 

Pariyon ki kahaniyan

एक लकडहारा बहुत नेक और दयालु था। वह सिर्फ सूखे पेड़ों की लकड़ी ही काटता था। वह सोचता कि अगर वह हरे पेडों को काटेगा तो बहुत से पशु पक्षियों का आश्रय छिन जाएगा। एक दिन वह सूखी लकड़ियों का गट्ठर लेकर लौट रहा था तो उसने देखा एक स्त्री हरे पेड़ को काट रही थी। उसने कहा कि इसे मत काटो पर वह बोली कि उसे लकडियां चाहिए। लकडहारे ने अपना गट्ठर उसे दे दिया ।शाम हो चुकी थी। लकडहारा लकड़ी बेचकर घर के लिये आटा दाल लाता था उस दिन वह बेचारा भूखा सोया।

रात को सपने में उसे परी दिखाई दी । वह बोली “तुम बहुत दयालु हो। तुमने खुद भूखे रहकर उस पेड को बचाया। आज के बाद तुम कभी भूखे नहीं रहोगे। यह कहकर परी ने छडी घुमाई और उसका कुल्हाड़ा सोने का हो गया।”

लकड़हारे की आंख खुली तो उसने सोचा कि यह सिर्फ़ सपना होगा पर वह हैरान रह गया । उसका कुल्हाड़ा कोने में रखा चमचमा रहा था। उसने कुल्हाड़े को बेचकर एक बाग खरीद लिया। अब उसके बाग में पक्षी फल खाते किलकारी करते। बाग से जो आमदनी होती उसमें से घरखर्च के लिए रखकर बाकी धन वह गरीब जरुरतमंदों में बांट देता। उसकी दयालुता से परी बहुत खुश थी।

धरती पर महामारी-Pariyon ki Kahaniyan 

एक बार धरती पर महामारी फैल गई। कोई किसी रोग से ग्रस्त हो गया तो कोई किसी रोग से।धरतीवासियों को महामारी से ग्रस्त देखकर परियों को दया आ गई। वे उनकी बीमारी की दवा खोजने के लिए दर दर भटकी। आखिर में उन्हें बहुत मेहनत के बाद वे दिव्य औषधीयां मिल गई।

पर सवाल ये था कि असंख्य लोगों तक ये औषधीयां कैसे पहुंचाई जाए।तब एक परी ने औषधी को नदी के जल में, एक ने पेड़ पौधों में, एक ने भुरभुरी मिट्टी में, एक ने हवा में और एक ने चांदनी की किरणों मे मिला दिया।इस तरह बीमार व्यक्ति ताजी हवा, नदी के जल, वनस्पति या चांदनी के संपर्क में आता गया वह स्वस्थ होता गया। आज भी कोई व्यक्ति बीमार दुर्बल होता है तो प्राकृतिक चिकित्सक उसकी चिकित्सा मिट्टी पानी  से करते हैं ।

जीवो से प्रेम करो-Pariyon ki Kahaniyan 

मोनू का दिनभर एक ही काम था तितलियों को पकड़ना और उन्हें अपनी किताब में बंद कर लेना। इस तरह तितलियाँ मर जाती थी। उसे पक्षियों को पत्थर मारना भी बहुत अच्छा लगता।एक दिन परी ने उसे ऐसा करते देखा तो उसे कहा कि तुम तितलियों और पक्षियों को मत सताया करो। पर वह नहीं माना। कुछ दिनों बाद उसके हाथों में फफोले हो गए। उनमें दर्द होने लगा। दिन प्रतिदिन उसका ये रोग बढता ही गया।

उसके पिता ने बहुत से डाक्टर और वैद्यों से इलाज करवाया पर जरा भी लाभ नहीं हुआ।एक दिन सपने में परी दिखाई दी उसने कहा, “तुमने बेकसूर तितलियों और पक्षियों को सताया है इसलिए तुम्हारी ये हालत हुई है अगर तुम प्रायश्चित करो तो तुम ठीक हो सकते हो।” “पर कैसे करूँ मैं प्रायश्चित?” मोनू ने परी से पूछा । “

रोज पक्षियों को द‍ाना डालो कोई पशु पक्षी मुसीबत में हो तो उसकी मदद करो।”मोनू ने वैसा ही किया। वह पक्षियों को दाना डालने लगा। खाना खाने बैठता तो अपने खाने में से कुछ खाना जानवरों को डालता। कोई पशु घायल होता तो उसकी मरहम पट्टी करता। कुछ दिनों में वह बिल्कुल स्वस्थ हो गया।

परी और गुलाब का पौधा-Pariyon ki Kahaniyan 

pariyon ki kahaniyan परियों की कहानियां परी और गुलाब का पौधा

एक दिन एक लाल परी जंगल में सैर कर रही थी। वहाँ एक गुलाब का पौधा था।उस गुलाब के पौधे पर बहुत ही खुशबूदार गुलाब लगे थे। उन गुलाबों की गंध से आसपास की हवा भी महक उठी। पर गुलाब का पौधा उदास था। परी ने पूछा , “तुम उदास क्यों हो?” वह बोला, “मुझपर बहुत खुशबुदार गुलाब लगे हैं पर मैं बेरंगा हूँ काश मैं दिखने मैं भी तुम्हारी तरह सुंदर होता”

“अच्छा! तो ये लो! अब से तुम भी मेरी तरह खूबसूरत दिखोगे” यह कहकर परी ने छडी घुमायी और गुलाब के पौधे पर लगे गुलाब शोख लाल रंगों के हो गए। अब गुलाब बहुत सुंदर लग रहा था वह खुशी से झूम उठा।

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जादुई किला-Pariyon ki Kahaniyan 

एक परी थी सुनहरे बालों वाली। अपनी जादुई छड़ी से वह दीन दुखियों की मदद करती थी। एक दुष्ट तांत्रिक परी से उसकी जादुई छड़ी छीनना चाहता था। इसके लिए उसने एक पुराने किले में तांत्रिक अनुष्ठान करके उसमें एक तिलिस्म रच दिया। वह किला खंडहर होते हुए भी तिलिस्मी जादू से सुंदर दिखाई देने लगा। परी उस किले में चली गई। जैसे ही वह अंदर गई, उसे महसूस हुआ की उसकी शक्तियों ने काम करना बंद कर दिया है, वह किसी तिलिस्म में फंस गई है।

उसने अपनी जादुई छड़ी घुमाई पर कुछ नहीं हुआ। सहसा किसी के जोर जोर से हंसने की आवाज आई। वह तांत्रिक हंस रहा था। वह बोला, “आखिर तुम तिलिस्म में फंस ही गई, अब अपनी जादुई छड़ी मुझे दे दे और मेरी गुलाम बन जा नहीँ तो तुझे जान से मार दूंगा” परी चिल्लाई, “नहीं, कभी नहीं! मैं तेरे शैतान इरादे कभी पूरे नहीं होने दूंगी, क्योंकि अगर ऐसा हो गया तो तू तबाही ला देगा” “तो फिर मरने के लिए तैयार हो जा” तांत्रिक चिल्लाया।

तांत्रिक एक अनुष्ठान करने लगा। वह आग में कुछ मन्त्र बोलकर आहुतियां देने लगा और परी दर्द से कराह उठी। “जैसे ही अनुष्ठान पूरा होगा तेरी जवानी और उम्र मुझे मिल जाएगी।” वह बोला। उधर किले से बाहर कुछ दूर एक गड़रिया अपनी भेड़े चराता था।

वह एक पत्थर पर बैठके बांसुरी बजाता और परी बांसुरी की धुन पर नृत्य करती थी।पर आज परी के ना आने से वो परेशान हो गया। वह उसे ढूंढने लगा। जैसे ही वह किले के पास से गुजरा, उसे परी के कराहने की आवाज सुनी।

वह चुपके से अंदर गया और देखा की वह दुष्ट तांत्रिक अनुष्ठान कर रहा है और परी कराह और चिल्ला रही है। उसे सारा माजरा समझ आ गया। उसने एक बड़ा सा पत्थर उठाकर तांत्रिक के सिर पर दे मारा। वह दर्द से चिल्लाने लगा। तभी परी बोली, “इसका तंत्र दण्ड तोड़ दो”। गड़रिये ने वैसा ही किया, तंत्र दण्ड टूटते ही किले का तिलिस्म भी टूट गया। परी आजाद हो गई।

परी की शक्तियां भी वापस आ गई। परी ने तांत्रिक को एक परीलोक की जेल में डाल दिया। परी और गड़रिया अच्छे दोस्त बन गए।

नटखट परी-Pariyon ki Kahaniyan hindi 

pariyon ki kahaniyan नटखट परी

नटखट परी था उसका नाम। जो जिद्द पकड़ लेती उसे पूरी करवाती। उसका नटखटपन सबको बहुत अच्छा लगता था। अपनी तोतली भाषा में वो सबका मन मोह लेती थी। एक बार उसने धरती पर जाने की जिद्द पकड़ ली। पर परी माँ ने मना कर दिया। नटखट परी रूठकर बाग़ में चली गई। परी माँ ने उसे बहुत मनाने की कोशिश की पर वह कहाँ मानने वाली थी। न कुछ खा रही थी, ना पी रही थी। आखिर परी ने उसकी बात मान ली और उसे धरती पर ले जाने को तैयार हो गई।

वहाँ कुछ बच्चे खेल रहे थे। वह भी उनके साथ खेलने लगी। परी माँ एक पेड़ पर निगरानी रखने लगी। तभी एक बदमाश आया और उन बच्चों के मुंह पर हाथ रखके उनका अपहरण करने लगा। सब बच्चे चिल्लाने लगे। परी ये सब देखकर चौकन्नी हो गई। उसने जादुई छड़ी घुमाई और वह बदमाश अँधा हो गया। सब बच्चे खुश हो गए। इसके बाद परी रानी ने सब बच्चों को उपहार दिए और नटखट परी को लेके आ गई। आज नटखट परी की वजह से मासूम बच्चों के ऊपर से खतरा टल गया।

परी की सीख-Pariyon ki kahani hindi mein

pariyon ki kahaniyan परियों की कहानियां परी को शाप 1

सारे बच्चे मिलकर बहुत शरारत कर रहे थे। तभी वहां डाल पर एक चिड़िया आकर बैठी। सब बच्चे उसे पत्थर मारने लगे। चिड़िया उड़ गई। थोड़ी देर बाद एक मेंढक जो की नाली के पास बैठा था, सब बच्चे उसे तंग करने लगे वह बेचारा जल्दी से भागा। इसी तरह वे सब जानवरों को खूब तंग करते। एक दिन परी ने उन्हें ये सब करते देखा। परी बच्चों से बोली, बच्चों जो तुम ये सब कर रहे हो, वह बिलकुल गलत है। इससे जानवरों को बहुत तकलीफ होती है। ये सब मत करो।

पर बच्चे नही माने। थोड़ी देर बाद परी ने एक बच्चे को मेंढक में बदल दिया। सब बच्चे उसे मारने लगे। तभी परी ने उसे वापिस बच्चे में बदल दिया, वह जोर जोर से रो रहा था।परी बोली, देखा, ऐसे ही जब तुम इन मासूम जानवरो को सताते हो तो इन्हें दर्द होता है। तब सब बच्चों को अपनी गलती का पता चला। उन्होंने किसी भी जानवर को तंग ना करने की कसम खाई।

परी ने छड़ी घुमाई और जो बच्चा घायल हो गया था वह बिलकुल ठीक हो गया। परी ने सब बच्चों को उपहार दिए और चली गई।

परी को शाप-Pariyon ki kahani hindi mein

pariyon ki kahaniyan परियों की कहानियां परी को शाप

एक परी को धरती पर घूमने का बहुत शौक था, एक दिन उसने देखा की एक सुंदर युवक बांसुरी बजा रहा है। वह मंत्रमुग्ध होकर सुनने लगी।इसी प्रकार वह रोज आकर उस युवक की बांसुरी की धुन सुनकर झूम उठती। एक दिन वह मंत्रमुग्ध होकर नृत्य करने लगी। युवक भी उसका नृत्य देख मंत्रमुग्ध हो उठा। वे दोनों एकदूसरे को प्रेमभरी निगाहों से देखने लगे। युवक ने आगे बढ़कर उसका आलिंगन कर लिया। बहुत देर दोनों साथ रहे।

आधी रात बीत गई। परी जाने लगी तो उसने देखा की वह उड़ नही पा रही। तभी उसकी छड़ी से आवाज आई, तुमने मानव के साथ प्रेम करके अपराध किया है, अब तुम्हेंयहीँ रहना होगा जबतक तुम्हारा प्रायश्चित नहीं हो जाता। परी को बिना शक्तियों के मानवों के साथ रहना पड़ा। एक वर्ष तक वह मुनष्यों के साथ रही। तबतक उसका शाप पूरा हो चूका था। जब वह जानेलगी तो सबकी आँखों में आंसू आ गए। परी ने वादा किया कि जबजब वे उसे सच्चे मन से उसे पुकारेंगे वो जरूर आएगी।

रानी परी का चुनाव- Pariyon ki kahaniyan new

हर वर्ष की भांति इस बार भी रानी परी का चुनाव होने वाला था। किसे इस बार रानी परी चुना जाए, जिससे परीलोक सुरक्षित और सुखी रहे। परीलोक पर शैतान जुम्बा ने आक्रमण कर दिया। वह कई परियों को कैद करके ले गया। तय हुआ कि जो परी अपनी सूझबूझ और शक्तियों सेपरियो को शैतान जुम्बा के चंगुल से छुड़ाएगी वहीं रानी परी बनेगी। सबसे पहले लालपरी जो सबसे शक्तिशाली थी उसे भेजा, पर वह सफल नहीं हो सकी।

इसके बाद चंद्रपरी गई, लेकिन वह भी शैतान के तिलिस्म को तोड़ न सकी। अंत में सोनपरी को भेजा गया। सोनपरी ने सबसे पहले ध्यान से शैतान जुम्बा के किले का निरीक्षण किया। एक ग्रह की रौशनी उसके किले को रोशन कर रही थी। सोनपरी ने सबसे पहले एक धूल कागुबार उठा दिया जिससे ग्रह से आने वाली रौशनी बन्द हो गयी। फिर उसने किले पर खोपड़ी के निशान को तोड़ दिया। अब किले में जाने का रास्ता साफ नजर आने लगा। अंदर शैतान जुम्बा परी पर हमला करने को तैयार बैठा था।

उसने जैसे ही परी पर हमला किया परी ने अपनी छड़ी से रोक लिया। परी ने उस पर अभिमंत्रित जल छिड़का तो वह तड़प उठा। परी ने उसका तांत्रिक दंड नष्ट कर दिया। और उस शैतान को उसके ही किले में कैद कर दिया।

सोनपरी की समझदारी से परियों की जान बच गई। सोनपरी को रानी परी चुना गया।

परी और नरभक्षी पेड़-Pariyon ki kahaniyan Cartoon

pariyon ki kahaniyan परियों की कहानियां परी और नरभक्षी पेड़

एक परी को वन में घूमने का बहुत शौक था। वह तितलियों के पीछे भागती, उनके साथ खेलती। जंगल में जानवरों के साथ मस्ती करती।उसी जंगल के अंदर एक नरभक्षी पेड़ था, जो अपने पास गुजरनेवालों को अपनी कंटीली लताओं में फंसाकर उसका खून चूस लेता था। परी ने उस पेड़ को नष्ट करने की ठान ली। परी को उस पेड़ की पहचान नहीं थी। क्योंकि वह पेड़ ओरो जैसा ही दीखता था। परी सावधानी से चलती रही। तभी एक लता आकर उसके पैर में लिपट गई।

उसके कांटे परी को चुभने लगे। पेड़ से और भी लताएं परी को अपने शिकंजे में लेने के लिए आगे बढ़ीं। परी ने तुरंत अपनी जादुई छड़ी से जादुई कुल्हाड़ा प्रकट किया और पेड़ के तने पर दे मारा, एक बड़ा खून का फव्वारा छूटा और पेड़ धराशायी हो गया।नरभक्षी पेड़ का अंत हो गया, अब सब पशु पक्षी खुश थे, सबने परी को धन्यवाद दिया।

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