Pariyon ki kahaniyan in hindi-दो मुंह वाला ड्रैगन

दो मुंह वाला ड्रैगन-Pariyon ki kahaniyan in hindi

Pariyon ki kahaniyan in hindi

एक ड्रेगन बहुत खतरनाक था, वह एक मुंह से आग उगलता तो दूसरे मुंह से बर्फीला तूफान। उसने आतंक मचा रखा था। रानी परी ने उसे खत्म करने का बीड़ा उठाया। ड्रेगन ने हमला कर दिया था। रानीपरी उसके सामने गई, वह आग उगलने लगा। परी ने खुद को आग से सुरक्षित करनेवाला कवच पहन लिया। अब वह शैतान बर्फीला तूफान उगलने लगा। परी ने जादुई फरसे से उसकी गर्दन काटनी चाही। पर उसका उस पर कोई असर नहीँ हुआ। उसे वरदान मिला था कि परीलोक की कोई शक्ति उस पर असर नहीं करेगी।

तभी परी ने एक योजना बनाई। उसने एक और परी को दूसरी तरफ से हमला करने को कहा। परी ने वैसा ही किया। दोनों मुंह एक साथ खुलने पर परी ने दोनों को मिला दिया। एक मुंह से आग निकली, और दूसरे से बर्फ का तूफान, दोनों ने एक दूसरे की शक्ति को काट दिया, एक मुंह आग से जलकर गिर गया, दूसरा बर्फ से गल गया। दुष्ट ड्रेगन का अंत हो गया। सब परी की जयजयकार करने लगे।

जलपरी का शाप-Pariyon ki kahaniyan in hindi

Pariyon ki kahaniyan in hindi

एक जलपरी थी, वह समुद्र किनारे रहनेवाले लोगों की मदद करती थी। एक बार जलपरी को मछुआरों ने अपने जाल में पकड़ लिया था, पर जलपरी ने प्रार्थना की तो मछुआरों को दया आ गई, तब से जलपरी ने वादा किया कि वह उन्हें कभी भोजन की कमी नहीं पड़ने देगी, पर उसने मछुआरों से वचन लिया की वे कभी समुद्री जीवों को नहीं पकड़ेंगे। तब से जलपरी ने तटपर रसीले फलों के पेड़ ऊगा दिए। उन्हें खाकर समुद्र तट पर रहनेवाले स्वस्थ और हट्टे कट्टे हो गए।

एकबार उस तटपर कुछ विदेशी लोग आए। उन्हें वे फल बहुत स्वादिष्ट लगे। उन्होंने इसका रहस्य पूछा। मछुआरों ने बताने से आनाकानी की तो उन्होंने मछुआरों को बहुत सा सोना देने का लालच दिया। मछुआरों ने जलपरी के बारे में बता दिया। विदेशी लोगों ने जलपरी के ठिकाने पर हमला कर दिया। वहां अन्य जलपरियां भी थी। उनमें और विदेशी लोगों में युद्ध हुआ। कई जलपरियां मारी गई। लालची विदेशी लोग मारे गए। तब से जलपरी ने शाप दिया की जो भी उनकी खोज में आएगा वह अँधा हो जाएगा। तब से जलपरी अदृश्य रुप से रहने लगी।

यह भी पढ़ें- Pariyon ki kahaniyan –>यहां क्लिक करें

परी और बूढी काकी-Pariyon ki kahaniyan in hindi

pariyon ki kahaniyan in hindiपरियों की कहानियां परी और बूढी काकी

एक बूढी औरत थी उसका कोई नहीं था, उसके आंगन में एक आम का पेड़ था जिस पर लगे आमों का मुरब्बा और अचार बनाकर वह गुजारा करती

थी। एक तीन परी उस बुढ़िया के आंगन में आई। उसे उसकी लाचारी पर बहुत दया आई। वह रोज रात को आती और उसका सारा काम कर जाती। सुबह उठकर बुढ़िया देखती की सारा घर साफ सुथरा है, किसी ने सारे बर्तन साफ करके रख दिए है, उसके कपड़े धुले हुए हैं, और खाना भी बना हुआ है। वह हैरान थी। रोज ऐसा होने लगा तो एक दिन वह सोई नहीं, और देखने लगी की कौन आता है उसका काम करने, उसने देखा की परी उसका काम कर रही है, उसकी आँखों में आंसू आ गए, वह परी के सामने गई और बोली, कौन हो तुम और मेरा काम क्यों कर रही हो?

परी ने कहा की उसे बुढ़िया की लाचारी पर बहुत दया आई इसलिए वह उसका काम करती है ताकि उसे न करना पड़े। बुढ़िया बोली, काश मेरा बेटा लापता न होता तो आज उसका बेटा बहु होते। परी ने अपनी जादुई शक्ति से देखा की वह किसी दूर जगह पर बुरी हालत में है। शायद उसकी याददाश्त चली गई और वह किसी के यहां नौकर बनकर काम करता है। परी ने उसके पास जाकर उसकी याददाश्त लौटा दी और उसके मालिक के चंगुल से छुड़ाया। बुढ़िया अपना बेटा पाकर बहुत खुश हुई उसने परी को ढेरों आशीष दिए।

 

जादुई पिटारा-Pariyon ki kahaniyan in hindi

Pariyon ki kahaniyan in hindi परियों की कहानियां जादुई पिटारा

एक बार रानी परी ने बहुत सी जादुई चीजें एक पिटारे में बंद करके रख दीं। रानी परी उस पिटारे को रखकर भूल गई। वह पिटारा एक शैतान के हाथ लग गया। वह उस पिटारे को पाकर उत्पात करने लगा। उस पिटारे में जादुई जूते थे जिन्हें पहनकर कोई पलक झपकते ही कहीं भी पहुंच सकता था। जादुई कंघे से बाल सुन्दर और काले हो जाते थे। जादुई शीशे से मनचाहा रूप बदला जा सकता था। इस तरह बहुत सी जादुई चीजें पाकर वह घमण्ड में चूर हो रहा था। परियों ने उससे प्रार्थना की कि वह जादुई पिटारा लौटा दे, पर वह नहीं माना। वह आए दिन कुछ

शैतानी हरक़तें करता जिससे सबको परेशानी होती थी। एक दिन वह जादुई पिटारा देख रहा था कि उसमें एक पिंजरा था। वह बहुत चमक रहा थी, क्योंकि उसमें हीरे जड़े थे। वह ध्यान से देखने लगा। तभी उसने देखा कि उसपे कुछ लिखा था। उसने उसे पढ़ा, “शैतान अंदर जा” ये बोलते ही वह छोटे आकार में आ गया, और पिंजरे में कैद हो गया क्योंकि वह शैतान हरकतें कर रहा था। इसके बाद वह पिटारा परियों को वापस मिल गया।

परी और लालची रामधन-Pariyon ki kahaniyan in hindi

Pariyon ki kahaniyan in hindi

एक था रामधन नाम का आदमी। वह बहुत लालची था, पैसों के लालच में वह पेडों को कटवाने लगा। अगर कोई उसके खिलाफ आवाज उठाता तो खिला पिलाकर वह उसका मुँह बंद कर देता था। परी ने जब देखा कि वह हरे भरे पेडों को कटवाता जा रहा है तो उसने राजधन को सबक सिखाने की सोची। एक दिन जब वह दोपहर को आ रहा था तो परी ने अपनी शक्ति से उसकी गाड़ी खराब कर दी।

राजधन परेशान हो गया। आसपास कोई पेड़ भी नहीं था, जिसके नीचे वह विश्राम कर लेता, वह पैदल चलने लगा, तभी उसे प्यास और गर्मी से चक्कर आने लगे, वह गिर पड़ा और बेहोश हो गया। उसने सपने में देखा कि सामने पेड़ है और उसपे रसीले फल लगे हैं, वह जैसे ही उसके पास जाता है वह उतनी ही दूर हो जाता है। वह रोने लगता है, तभी परी प्रकट होती है, और उससे कहती है, “तूने सारे पेड़ कटवा दिए, अब तेरी यहीं सजा है” राजधन बोला, “मुझे माफ़ कर दो, मैं प्रायश्चित करूँगा, जितने पेड़ काटे हैं, उससे दुगुने लगाऊंगा” परी ने कहा, “ठीक है, पर अपना वादा पूरा करना”

ये कहते ही उसे होश आया, एक राहगीर उसपर पानी के छींटे मार रहा था, उसने राजधन को ठंडा पानी पिलाया। राजधन ने राहत की साँस ली। उसकी गाड़ी भी ठीक हो गई। इसके बाद रामधन रोज पेड़ लगाता, उसके प्रायश्चित पूरा करने पर परी ने उसे सदा स्वस्थ रहने का वरदान दिया।

यह भी पढ़ें- Pariyon ki kahaniyan –>यहां क्लिक करें

परी और पिंकी-Pariyon ki kahaniyan in hindi

pariyon ki kahniyan in hindi परियों की कहानियां परी और पिंकी

पिंकी एक 8 साल की लड़की थी। वह सारा दिन गुड़ियों से खेलती रहती। एक दिन परी ने देखा कि पिंकी गुड़ियों से बहुत नटखट बातें कर रही है।

पिंकी बोली, “गुड़िया, तेरी शादी है, नीतू के गुड्डे से, फिर तू उसके गुड्डे के साथ चली जाएगी, मुझे तेरी बहुत याद आएगी” परी को पिंकी की बातें बहुत अच्छी लगी। वह पिंकी के पास गई और बोली, “मुझे भी अपने साथ गुड़िया का खेल खिलाओ” “ठीक है, पर तुम मुझे क्या दोगी?” पिंकी ने पूछा।

“मैं तुम्हारे लिए फल और खिलौने लाऊंगी” परी ने कहा। “ठीक है” पिंकी बोली। परी को पिंकी के साथ खेलना बहुत अच्छा लगा। तभी पिंकी की मम्मी की आवाज आई, वह बोली, “पिंकी तुम सारा दिन खेलती हो, कभी पढ़ भी लिया करो”

पिंकी ने मम्मी की बात नजरअंदाज कर दी। परी ने कहा, “पिंकी, क्या तुम्हें पढ़ना आता है?” पिंकी ने कहा, “नहीं” “तो फिर तुम्हारी गुड़िया ससुराल जाकर तुम्हें चिट्ठी लिखेगी तो तुम उसे कैसे पढ़ोगी, और तुम्हें कैसे पता चलेगा कि तुम्हारी गुड़िया किस हाल में है? और तुम उसे जवाब क्या लिखोगी, बोलो?” परी ने पूछा। पिंकी कुछ न बोल सकी।

परी ने कहा, “मैं तुम्हारे साथ तभी खेलूंगी जब तुम पढ़ोगी, बोलो हाँ या ना” “मैं मन लगाकर पढूँगी” पिंकी ने वादा किया। पिंकी अब मन लगाकर पढ़ने लगी।

परी और ममी-Pariyon ki kahaniyan in hindi

एक बार नन्ही मीना अपने स्कुल की तरफ से पिरामिड देखने गई। वहाँ बहुत सी मुर्दा लाशोंको ममी बनाकर रखा गया था। उनके साथ उनके बेशकीमती मुकुट और अन्य सामान जैसे आभूषण और हथियार थे। सभी बच्चे हैरान थे। वे उन चीजों को कौतूहल के साथ देख रहे थे। तभी एक शरारती बच्चे ने ममी के पास एक चमकीला हीरा उठाकर जेब में डाल लिया। शायद उसकी इस हरकत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। तभी ममी गुस्से में आकर खड़ी हो गई। उसकी आंखें अंगारों की भांति दहकने लगी। वह बच्चों की तरफ बढ़ने लगी। उसने दो बच्चों को पकड़ लिया। सब बुरी तरह चिल्लाने लगे। धीरे धीरे और ममियां भी खड़ी होने लगी। तभी

एकाएक पिरामिड का बाहर जाने का रास्ता बंद हो गया। मीना ने परी को याद किया। दरअसल परी ने एक दिन मीना से वादा किया था कि जब कभी मीना मुसीबत में उसे याद करेगी, वो जरूर आएगी। तभी परी प्रकट हुई। उसने अपनी जादुई छड़ी से दोनों बच्चों को छुड़ाया। परी ने अपनी शक्ति से बाहर जाने का दरवाजा खोल दिया। सब बच्चे बाहर जाने लगे, तभी जिस बच्चे के पास हीरा था, वह गिर पड़ा, उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, उसने कहा, मैंने हीरा चुराया, इसलिए मुझे सजा मिली। यह कहके उसने हीरा निकाला। परी ने हीरा वापस वहीं रख दिया। परी ने उस बच्चे की

आँखें ठीक कर दी। परी ने सब ममियों को शांत किया और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। सब परी को धन्यवाद देने लगे।

 

परी और दयालु दीनू-Pariyon ki kahaniyan in hindi

एक दीनू नाम का आदमी बहुत दयालु था। वह सब पर बहुत दया करता। एक बार उसे कहीं काम न मिला। वह काम की तलाश में बाहर निकला

एक फुट के पेड़ हैं। वे आम के पेड़ रोज एक फुट बढ़ जाते। पन्द्रह दिन में ही वे विशाल पेड़ बन गए। सोलहवें दिन वे आमों से लद गए। सब लोग अचंभे में थे। दीनू इसे बुढ़िया का आशीर्वाद मान रहा था। उसकी गरीबी दूर हो गई। वह अक्सर सबको मुफ्त आम बाट देता था। दीनू के बच्चे कुछ सालों में बड़े हो गए। उनकी शादी हो गई। दीनू अब बूढ़ा हो गया। एक दिन दीनू का बेटा आम तोड़कर शहर बेचने जा रहा था। तभी वह परी बुढ़िया का भेष बदलकर आई, और कुछ आम मांगने लगी। दीनू के बेटे ने बुढ़िया को डांट दिया और आम देने से मना कर दिया।

बुढ़िया उदास होकर चली गई। कुछ दिनों बाद वे पेड़ मुरझाने और सूखने लगे। दीनू के बेटे चिंतित हो गए। उन्होंने दीनू को सारी बात बताई। दीनू समझ गया कि यह सब बुढ़िया के आशीर्वाद का असर खत्म होने के कारण हुआ है। उसने अपने बेटों को सारी कहानी बताई और कहा कि अगर उस दिन उसने बुढ़िया पर दया करके आम दिए होते तो ये पेड़ नहीं मुरझाते।दीनू के बेटे अब पछताने लगे पर अब क्या हो सकता था।

यह भी पढ़ें- Pariyon ki kahaniyan –>यहां क्लिक करें

ब्यूटी और दैत्य-Pariyon ki kahaniyan in hindi

एक धनवान सौदागर था। उसकी तीन अति सुंदर पुत्रियाँ थी। उनमें से सबसे छोटी पुत्री सबसे अधिक रूपवान और समझदार थी। इसीलिए उसका नाम “ब्यूटी” पड़ा।

एक दिन सौदागर शहर गया। शहर से वापस लौटते समय सौदागर रास्ता भटक गया और एक सूने महल में जा पहुँचा। सौदागर थक कर वहीं सो गया। अगले दिन चलते समय उसने महल के खूबसूरत बगीचे से कुछ गुलाब के फूल तोड़े।

तभी अचानक एक दैत्य ने प्रकट होकर कहा, “अकृतज्ञ मानव! अब तेरी मृत्यु निश्चित है।” भयभीत सौदागर ने अपने प्राणों की भिक्षा मांगी। दैत्य ने एक शर्त रखी- “यदि तुम अपनी किसी भी पुत्री को मेरे पास रहने के लिए भेज दोगे तो मैं तुम्हें जीवित छोड़ दूँगा।” सौदागर ने उसकी बात मान ली और घर लौट गया। जब उसने अपनी पुत्रियों को सारी बात बताई तब ब्यूटी ने कहा, “पिता

जी! आपको कुछ नहीं होगा। मैं दैत्य के पास जाऊँगी।”

अपने पिता के साथ वह दैत्य के महल में पहुँची। रात्रि के भोजन के बाद दैत्य प्रकट हुआ। उसने उससे पूछा, “क्या तुम अपनी मर्ज़ी से आई हो?” “हाँ,” ब्यूटी ने उत्तर दिया। दैत्य यह सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुआ और उसने ब्यूटी के सामने महल घूमने का प्रस्ताव रखा।

ब्यूटी महल में घूमने लगी। एक द्वार खोलते ही ब्यूटी को किताबों और वाद्य-यंत्रों से सजा कमरा दिखा, जिसे देखते ही वो मुग्ध हो गई। वह अत्यंत प्रसन्न हुई और दैत्य के साथ रहने लगी।

तीन माह बीत चुके थे। ब्यूटी अपने पिता से मिलना चहती थी। दैत्य ने उसे अनुमति देते हुए कहा, “वादा करो कि तुम एक सप्ताह में लौट आओगी वरना मैं जीवित नहीं रहूँगा।” ब्यूटी ने सहमति दी और वह खुशी-खुशी अपने पिता के पास लौट आई।

एक रात उसने स्वप्न में देखा कि महल के बगीचे में दैत्य मरणासन्न अवस्था में पड़ा है। वह भयभीत होकर तुरंत लौट आई। उसने दैत्य को झरने के किनारे मरणासन्न अवस्था में पाया। ब्यूटी विलाप करती हुई उससे लिपटकर बोली, “प्रिय दैत्य, कृपया आँखें खोलो। मैं तुमसे विवाह करूँगी।”यह सुनते ही दैत्य एक सुंदर राजकुमार में परिवर्तित हो गया। राजकुमार ने उसे समझाया, “एक जादूगरनी ने मुझे दैत्य बना दिया था। उस श्राप से मुझे मुक्ति तभी मिलती जब कोई सुंदर स्त्री स्वेच्छा से मुझसे विवाह के लिए राजी होती । ” दोनों ने विवाह कर लिया और सुखपूर्वक रहने लगे।

यह भी पढ़ें- Pariyon ki kahaniyan –>यहां क्लिक करें

कहानियाँ पसंद आई?शेयर करना ना भूलें 👇👇👇

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नई कहानियों के बारे में नवीनतम अपडेट! पाएं सीधे अपने इनबॉक्स में